आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "marja-e-aGyaar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "marja-e-aGyaar"
ग़ज़ल
मरजा-ए-गब्र-ओ-मुसलमाँ है वो बुत नाम-ए-ख़ुदा
भेजते हैं उसे हिन्दू ओ मुसलमाँ काग़ज़
मातम फ़ज़ल मोहम्मद
शेर
मरजा-ए-गब्र-ओ-मुसलमाँ है वो बुत नाम-ए-ख़ुदा
भेजते हैं उसे हिन्दू ओ मुसलमाँ काग़ज़
मातम फ़ज़ल मोहम्मद
अन्य परिणाम "marja-e-aGyaar"
ग़ज़ल
मरजा-ए-बर्क़-ए-बला है ऐ 'वफ़ा' दुनिया-ए-इश्क
हासिल-ए-हसरत यहाँ जुज़ हसरत-ए-हासिल नहीं
मेला राम वफ़ा
ग़ज़ल
कह दो बक़्क़ाल पिसर से कि मिरा दिल ले कर
क़स्द-ए-अख़्ज़-ए-दिल-ए-अग़्यार न हाँ कीजिएगा
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
नज़्म
पयाम-ए-हस्ती
जो इस आलम में चलना है तुझे हुक्म-ए-अइद्दू पर
तो इस्तेदाद-ए-दफ़ा-ए-हमला-ए-अग़्यार पैदा कर