aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "mataa-e-ulfat"
लुत्फ़-ए-सोहबत मता-ए-उल्फ़त हैकुछ कहो और कुछ सुनो प्यारे
मैं उस को सूरत-ए-ख़रगाह-ओ-ख़ेमा हूँ 'उल्फ़त'मिरा सनम मुझे मिस्ल-ए-तनाब लगता है
नींद जब खुली 'उल्फ़त' उस की याद आ बैठीकरवटें लीं साँसों ने गर्मियों के पहलू में
ख़ुत्बा-ए-आख़िर में सब समझा दियाकर दी क़ाएम हम ने उल्फ़त चुप रहो
रश्क आता है मुझे रस्म-ए-वफ़ा पर 'उल्फ़त'बेवफ़ा होना यहाँ शर्त-ए-वफ़ा है अब भी
नासेहो हम तो ख़रीदेंगे मता-ए-उल्फ़ततुम को क्या फ़ाएदा होता है ज़रर होने दो
देखिए हाल-ए-परेशाँ को उलट कर 'उल्फ़त'हम किसी माज़ी के खोए हुए आइंदा हैं
मता-ए-हुस्न-ओ-उल्फ़त पर यक़ीं कितना था दोनों कोयहाँ हर चीज़ फ़ानी है न तुम समझे न हम समझे
'फ़ज़ा' मता-ए-क़लम को सँभाल कर रक्खोकि आफ़्ताब इसी दुर्ज-ए-गुहर से निकलेगा
कभी देखा था हम ने 'शान' उन कोमता-ए-दिल वही रानाइयाँ हैं
जो कुछ मता-ए-दिल थी वो सब ख़त्म हो गईअब कारोबार-ए-शौक़ के क़ाबिल नहीं रहा
चारा-साज़ी मरीज़-ए-उल्फ़त कीआप के वास्ते नहीं मुश्किल
रस्म-ए-उल्फ़त का पास है वर्नाग़ैर ख़ुद पे हलाल कर लेता
दर्स-ए-उल्फ़त है ज़माने के लिए मेरा जुनूँशौक़ से अहल-ए-बसीरत मुझ को दीवाना कहें
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