आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mutrib-e-KHush-KHuu"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "mutrib-e-KHush-KHuu"
अन्य परिणाम "mutrib-e-KHush-KHuu"
ग़ज़ल
मुतरिब-ए-ख़ुश-नवा न जा ज़ख़्म-ए-जिगर कुरेद कर
छेड़ा है जिस पे साज़-ए-दिल नग़्मा वही सुनाए जा
नाज़िश सिकन्दरपुरी
ग़ज़ल
मुतरिब-ए-ख़ुश-आवाज़ हुई है ज़ख़्म-आवर आहंग-ए-बला
वो जो मिरे हिस्से की लय थी तेरे गले में ढलती है
अज़ीज़ हामिद मदनी
ग़ज़ल
मजीद मैमन
ग़ज़ल
उस ने इक रोज़ में सौ बार रुलाया मुझ को
मुझ से पर उस बुत-ए-ख़ुश-ख़ू को मनाया न गया
ग़मगीन देहलवी
ग़ज़ल
बज़्म-ए-सुख़न में ऐ 'रशीद' नग़्मे से मुझ को काम क्या
शाइर-ए-शोख़-फ़िक्र हूँ मुतरिब-ए-ख़ुश-गुलू नहीं
रशीद रामपुरी
ग़ज़ल
गर्दिश-ए-जाम हो जूँ गर्दिश-ए-चश्मान-ए-बुताँ
हाथ में मुतरिब-ए-सर-ख़ुश के सितार आए नज़र
जुरअत क़लंदर बख़्श
ग़ज़ल
चंग ब-दस्त नय-ब-लब मुतरिब-ए-दिल-नवाज़ भी
गर्म-नवा चमन चमन ताइर-ए-ख़ुश-गुलू भी है
प्रेम शंकर गोयला फ़रहत
ग़ज़ल
शहर में और भी होगा कोई ख़ुश-ख़ू तुझ सा
आख़िर-ए-कार तेरे ज़ख़्मों ने भरना भी तो है