आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "neza-e-baatil"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "neza-e-baatil"
ग़ज़ल
हर तरफ़ मक़्तल में है छाई हुई वीरानियाँ
नेज़ा-ए-बातिल पे आख़िर मेरा सर देखेगा कौन
अफ़ज़ल इलाहाबादी
ग़ज़ल
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
अन्य परिणाम "neza-e-baatil"
ग़ज़ल
सुना था नेज़ा-ओ-तलवार-ओ-ख़ंजर बेच डाले हैं
मगर ज़िल्ल-ए-इलाही ने तो लश्कर बेच डाले हैं
नफ़स अम्बालवी
ग़ज़ल
का'बे से हो या देर से मंज़िल पे पहुँच जाऊँ
इक धुन है तमीज़-ए-हक़-ओ-बातिल नहीं रखता
यगाना चंगेज़ी
ग़ज़ल
नेज़ा-ओ-शमशीर-ओ-ख़ंजर की अगर इफ़रात है
ख़ून की भी मेरी रग रग में फ़रावानी रहे
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
ग़ज़ल
असा-ए-दिल तमीज़-ए-हक़्क़-ओ-बातिल खींच देता है
उसे बख़्शा गया है दहर में यूँ हक़-नुमा रहना
राव मोहम्मद उमर
ग़ज़ल
आफ़्ताब-ए-दिल से गरमा और चमका दे उसे
ज़र्रा-ए-हक़ जो निहाँ गर्द-ए-रह-ए-बातिल में है
अमजद अली ग़ज़नवी
ग़ज़ल
रज़्म-गाह-ए-हक़-ओ-बातिल में रहो सीना-सिपर
ज़िंदा रहना है तो बस ग़ाज़ी-ए-दौराँ जैसे