आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "nigah-e-chashm-e-surma"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "nigah-e-chashm-e-surma"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "nigah-e-chashm-e-surma"
अन्य परिणाम "nigah-e-chashm-e-surma"
ग़ज़ल
दिल की चोरी में जो चश्म-ए-सुर्मा-सा पकड़ी गई
वो था चीन-ए-ज़ुल्फ़ में ये बे-ख़ता पकड़ी गई
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
शेर
मुँह ज़र्द ओ आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर
सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है
नज़ीर अकबराबादी
शेर
हुस्न के जल्वे नहीं मुहताज-ए-चश्म-ए-आरज़ू
शम्अ जलती है इजाज़त ले के परवाने से क्या
आनंद नारायण मुल्ला
ग़ज़ल
ज़मीन-ए-चश्म-ए-नम में हम को तेरा ख़्वाब बोना था
तिरी हर याद का मोती तो पलकों में पिरोना था
लुबना सफ़दर
ग़ज़ल
राज़-ए-चश्म-ए-मय-गूँ है कैफ़-ए-मुद्दआ' मेरा
ग़ैर की नज़र से है दूर मै-कदा मेरा
अली मंज़ूर हैदराबादी
ग़ज़ल
वाह क्या फ़ैज़ान-ए-चश्म-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना था
जिस तरफ़ नज़रें उठीं मय-ख़ाना ही मय-ख़ाना था
मोहम्मद मूसा
शेर
रुख़्सत-ए-चश्म-ए-तमाशा का है मातम वर्ना
इक ख़लिश पहलू में रहती थी जहाँ आज भी है


