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ग़ज़ल
नोचे हैं कभी हम ने हवादिस के गरेबाँ
नाकामी-ए-कोशिश पे कभी हाथ मले हैं
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
नज़्म
एक दिन की बादशाही
इतनी सी उम्र में भी फ़ित्ने उठाएँ क्या क्या
पिंकी के गाल नोचे बब्लू को जा खसोटा
बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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रेख़्ता शब्दकोश
niiche
नीचे نِیچے
ऐसी स्थिति में जिसमें उसके ठीक ऊपर भी कुछ हो। जैसे (क) कुरते के नीचे गंजी पहन लो। (ख) मोटी किताब के नीचे पतली किताब रखना। पद-नीचे ऊपर उलट-पलट। अस्त-व्यस्त। अव्यवस्थित। जैसे- सब चीजें ज्यों की त्यों रहने दो, नीचे-ऊपर मत करो। नीचे से ऊपर तक = (क) एक सिरे से दूसरे सिरे तक। (ख) सब अंगों या भागों में। सर्वत्र। मुहा०-नीचे उतारना = मरते हुए व्यक्ति को खाट, पलंग आदि पर से हटाकर नीचे जमीन पर लेटाना। (हिंदू) नीचे गिरना = आचार-विचार, मान-मर्यादा आदि की दृष्टि से पतित या हीन होना। जैसे-हम नहीं जानते थे कि तुम इतना नीचे गिरोगे। नीचे लाना-- (क) जमीन पर गिराना और पछाड़ना। (ख) नीचे उतारना। (ऊपर देखें)
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ग़ज़ल
हमारी आँख से नोचे गए हैं सब हसीं मंज़र
नज़र छीनी गई है और नज़ारे बेच डाले हैं
इरशाद क़मर बुख़ारी
नज़्म
दूर की शहज़ादी
इक रोज़ उन्हों ने बालों से मेरे अफ़्शाँ
मेरी नोची, नोचे कानों से आवेज़े
आसिफ़ रज़ा
हास्य
ये खाए रोटियाँ मेरी वो नोचे बोटियाँ मेरी
चमन में हर तरफ़ उड़ती हुई लँगोटियाँ मेरी
सय्यद ज़मीर जाफ़री
कुल्लियात
ये क्या है कि मुँह नोचे नै चाक करे सीना
कर अर्ज़ जो कुछ तुझ में ऐ 'मीर' हुनर भी है
मीर तक़ी मीर
नज़्म
शरारत की पुतली
कभी बाल नोचे कभी चुटकियाँ लीं
कभी पिन चुभो दी कभी घुड़कियाँ दीं
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
ग़ज़ल
अपने पर अपनी ही मिंक़ार से नोचे मैं ने
क्या करूँ ताब-ए-फ़रामोशी-ए-सय्याद नहीं
मुंशी बनवारी लाल शोला
नज़्म
'इस्मत के फूल
यहाँ पे लोग मोहब्बत के गीत गाते हैं
यहीं पे जिस्म ग़रीबों के नोचे जाते हैं