आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "pakaa.e"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "pakaa.e"
ग़ज़ल
कलीम आजिज़
नज़्म
बदन से पूरी आँख है मेरी
हम चाहें तो सूरज हमारी रोटी पकाए
और हम सूरज को तंदूर करें
सारा शगुफ़्ता
समस्त
