aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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परवीन शाकिर
1952 - 1994
शायर
मेरा गुनाह यह है कि मैं एक ऐसे क़बीले में पैदा हुई जहाँ सोच रखना जुर्म में शामिल है, मगर क़बीले वालों से भूल यह हुई कि उन्होंने मुझे पैदा होते ही ज़मीन में नहीं गाड़ा और अब मुझे दीवार में चुन देना इनके लिए अख़लाक़ी तौर पर इतना आसान...
जानमुझे अफ़्सोस है
تیس دسمبر کی شام جب نیا سال صرف ایک دن کے فاصلے پر تھا اور پوری دُنیا کی توجہ سڈنی میں منعقد ہونے والی شاندار آتش بازی کی طرف تھی، ہم اسی سنہرے ساحلوں والے شہر سڈنی میں ایک خوبصورت ادبی محفل سجائے بیٹھے تھے۔...
मुझे मत बतानाकि तुम ने मुझे छोड़ने का इरादा किया था
नन्ही लड़कीसाहिल के इतने नज़दीक
पाकिस्तान की सबसे लोकप्रिय शायरात में शामिल। स्त्रियों की भावनओं को आवाज़ देने के लिए मशहूर
Parveen Shakir
साहिल अहमद
Khushboo
इंकार
सद बर्ग
खुद कलामी
Khud Kalami
ग़ज़ल
काव्य संग्रह
फ़रहत यासमीन
Parveen Shakir Ke Khutoot Nazeer Siddiqi Ke Naam
जावेद वार्सी
लेख
Kulliyat-e-Parveen Shakir
कुल्लियात
कफ़-ए-आइना
Kaf-e-Aaina
Inkar
कविता
Sad Barg
वही नर्म लहजाजो इतना मुलाएम है जैसे
'अजीब मौसम था वो भी जबकि'इबादतें कोर चश्म थीं
तुम्हारा कहना हैतुम मुझे बे-पनाह शिद्दत से चाहते हो
इतने घने बादल के पीछेकितना तन्हा होगा चाँद
बारहा तेरा इंतिज़ार कियाअपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह
लड़की!ये लम्हे बादल हैं
पूरा दुख और आधा चाँदहिज्र की शब और ऐसा चाँद
इक हुनर था कमाल था क्या थामुझ में तेरा जमाल था क्या था
राय पहले से बना ली तू नेदिल में अब हम तिरे घर क्या करते
अपने फ़ोन पे अपना नंबरबार बार डायल करती हूँ
मैं ने सारी उम्रकिसी मंदिर में क़दम नहीं रक्खा
बहुत रोया वो हम को याद कर केहमारी ज़िंदगी बरबाद कर के
अब्र बरसे तो इनायत उस कीशाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है
अपनी ही सदा सुनूँ कहाँ तकजंगल की हवा रहूँ कहाँ तक
रुकने का समय गुज़र गया हैजाना तिरा अब ठहर गया है
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