आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "pas-e-chilman"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "pas-e-chilman"
नज़्म
यादें
हाए वो नुक़रई आवाज़ वो तीखे ख़द-ओ-ख़ाल
पस-ए-चिलमन वो नज़ारों का जहाँ याद आया
कामिल चाँदपुरी
ग़ज़ल
देखिए उस बुत-ए-काफ़िर के सताने की अदा
ख़्वाब में दिखता है तो भी पस-ए-चिलमन-चिलमन
रेशमा नाहीद रेशम
अन्य परिणाम "pas-e-chilman"
ग़ज़ल
पस-ए-चिलमन हैं तो चिलमन को उठा ही दीजे
इस तकल्लुफ़ पे नुमाइश का गुमाँ होता है
कमाल अहमद सिद्दीक़ी
नज़्म
खंडर
पस-ए-पर्दा किसी आवाज़ के घुंघरू नहीं बजते
पस-ए-चिलमन किसी रुख़्सार की ताबिश नहीं होती
क़ैसर-उल जाफ़री
ग़ज़ल
देख लेना पस-ए-क़ातिल भी कोई होगा ज़रूर
सिर्फ़ क़ातिल ही चलाता नहीं ख़ंजर देखो
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
न रहा धुआँ न है कोई बू लो अब आ गए वो सुराग़-जू
है हर इक निगाह गुरेज़-ख़ू पस-ए-इश्तिआ'ल के दरमियाँ
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
ये चराग़ मेरी उमीद का ये घड़ी घड़ी तिरा मश्ग़ला
कभी दूर ही से जला दिया कभी पास आ के बुझा दिया
आले रज़ा रज़ा
शेर
तू है मअ'नी पर्दा-ए-अल्फ़ाज़ से बाहर तो आ
ऐसे पस-मंज़र में क्या रहना सर-ए-मंज़र तो आ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
तू है मअ'नी पर्दा-ए-अल्फ़ाज़ से बाहर तो आ
ऐसे पस-मंज़र में क्या रहना सर-ए-मंज़र तो आ