आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sabaat-e-abad"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "sabaat-e-abad"
ग़ज़ल
पूछ मत 'अब्बाद' शहर-ए-फ़िक्र में
किस को शोहरत किस को रुस्वाई मिली
सैफ़ुर्रहमान अब्बाद ग़ाज़ीपूरी
नज़्म
फ्लैश-बैक
वो अपने जिस्म का और हुस्न का जादू जगाती है
हरीम-ए-नाज़ को बद-ज़ातों से आबाद करती है
अबु बक्र अब्बाद
शेर
क्यूँ उजाड़ा ज़ाहिदो बुत-ख़ाना-ए-आबाद को
मस्जिदें काफ़ी न होतीं क्या ख़ुदा की याद को
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
baad-e-sabaa
बाद-ए-सबा بادِ صَبا
सवेरे की पुर्वा हवा, वह हवा जो प्रभात और प्रातःकाल के समय पूर्व की ओर से चलती है
'aalam-e-aabaad
'आलम-ए-आबाद عالَمِ آباد
दुनिया, ज़मीन
shaad-o-aabaad
शाद-ओ-आबाद شاد و آباد
जो प्रसन्न भी हो और समृद्ध भी।।
अन्य परिणाम "sabaat-e-abad"
ग़ज़ल
एक पत्ता भी नहीं हिलता ब-जुज़ हुक्म-ए-ख़ुदा
किस तरह आबाद कर लें अपने वीराने को हम
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
तू ऐ दोस्त कहाँ ले आया चेहरा ये ख़ुर्शीद-मिसाल
सीने में आबाद करेंगे आँखों में तो समा न सके
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
हिंदी ग़ज़ल
आरज़ुओं की बयाबानी है और ख़ामोशियाँ
ज़िंदगी को क्यूँ सबात-ए-नक़्श-ए-पा देता हूँ मैं
शमशेर बहादुर सिंह
ग़ज़ल
हबाब-आसा कोई लहज़ा सबात-ए-उम्र-ए-फ़ानी है
जो आक़िल हो वफ़ा-ए-ज़िंदगानी बे-वफ़ा समझे
नसीम देहलवी
ग़ज़ल
मुझ को सबात-ए-जैब-ओ-गरेबाँ नहीं पसंद
मैं ख़ुश हूँ अपने पैरहन-ए-तार-तार में
