आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sabaq-e-shauq"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "sabaq-e-shauq"
ग़ज़ल
क्या जाने कैसे ख़्वाब सजाने पड़ें ऐ 'शौक़'
आँखो में इक हसीन सा मंज़र भी ले चलो
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
ग़ज़ल
हैं उस के सामने ऐ 'शौक़' किस शुमार में फूल
खिले हों जिस के कफ़-ए-पा से रेगज़ार में फूल
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
अन्य परिणाम "sabaq-e-shauq"
ग़ज़ल
बैठा हुआ सिक्का है मिरी फ़िक्र-ए-सुख़न का
ऐ 'शौक़' न हों क्यूँ मिरे अश’आर रजिस्टर्ड
शौक़ बहराइची
ग़ज़ल
फ़ुर्सत मिले कभी तो शब-ए-ग़म से पोंछना
टूटे हैं चश्म-ए-'शौक़' से तारे कहाँ कहाँ
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
ग़ज़ल
वुफ़ूर-ए-शौक़ में इंसान ख़ुद को भूल जाता है
तुम आए सामने तो जब समझ में ये मक़ाम आया
ख़्वाजा शौक़
ग़ज़ल
ऐ 'शौक़' ये जफ़ाएँ हैं क्या ये सितम हैं क्या
हर इम्तिहाँ में बैठ कोई इम्तिहाँ न छोड़
शौक़ बहराइची
ग़ज़ल
राएगाँ होने न दो ऐ 'शौक़' तुम वक़्त-ए-अज़ीज़
ये वो शय है जो नहीं मिलती है खो जाने के बाद
शौक़ देहलवी मक्की
ग़ज़ल
यही तो 'शौक़'-ए-मजबूरी है अपनी बज़्म-ए-साक़ी में
हज़ार इंकार करते हैं मगर जाना ही पड़ता है