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नज़्म
नास्तिक
ये मिरा शीशा-ए-दिल आइना-ए-सादा-ओ-साफ़
सब्त कुछ इस पे मशिय्यत के फ़रामीन भी हैं
मख़मूर सईदी
ग़ज़ल
सदा-ए-कलेमतुल-हक़ में तिरी तहरीक शामिल है
अनल-हक़ कहता है हर क़तरा-ए-ख़ून-ए-जिगर मेरा
मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़
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लघु कथा
सआदत हसन मंटो
ग़ज़ल
सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर
तग़य्युर आब-ए-बर-जा-मांदा का पाता है रंग आख़िर
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
सदमा-ए-शाम-ए-अजल मुझ को न बिल्कुल पहुँचे
गर मिरी दाद को कल तक भी वो काकुल पहुँचे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
उस की सूरत से हूँ सन्ना-ए-अज़ल का क़ाइल
जल्वा-ए-क़ुदरत-ए-हक़ हुस्न-ए-बशर है कि नहीं
मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़
ग़ज़ल
शामिल हैं सदा स'य-ए-‘अमल में सफ़ा मर्वा
का'बे की ज़मीं अस्ल में फ़िरदौस-ए-बरीं है