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रेख़्ता शब्दकोश
qadar-daan-e-suKHan
क़दर-दान-ए-सुख़न قدر دان سخن
कविता के पारखी
sadaa din ek se nahii.n rahte
सदा दिन एक से नहीं रहते سَدا دِن ایک سے نَہِیں رَہْتے
समय हमेशा बदलता रहता है, कभी आराम है कभी तकलीफ़
ye bhii sikshaa naath jii kah ga.e Thiikam-Thiik, kho de.n aadar maan ko daGaa lobh aur bhiik
ये भी सिक्शा नाथ जी कह गए ठीकम-ठीक, खो दें आदर मान को दग़ा लोभ और भीक یِہ بھی سِکشا ناتھ جی کَہہ گئے ٹِھیکم ٹِھیک، کھو دیں آدر مان کو دغا لوبھ اور بھیک
धोखा लालच और भीख मनुषेय के सम्मान को खो देते हैं
din das aadar paay ke karnii aap bakhaan, jo lag kaag saraadh pakh to lag to sanmaan
दिन दस आदर पाय के करनी आप बखान, जो लग काग सराध पख तो लग तो सनमान دِن دس آدَر پائے کے کَرنی آپ بکھان، جو لگ کاگ سرادَھ پَکھ تو لگ تو سَنمان
थोड़े दिनों का सम्मान, तू प्रसन्न हो ऐ कौवे सराध के दिनों में तेरा सम्मान होगा
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ग़ज़ल
बद्र-ए-आलम ख़लिश
नज़्म
गुलहा-ए-अक़ीदत
ख़ून-ए-दिल देना पड़ा ख़ून-ए-जिगर देना पड़ा
अपने ख़्वाबों की हसीं परछाइयाँ देना पड़ीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
गुम हुए जाते हैं धड़कन के निशाँ हम-नफ़सो
है दर-ए-दिल पे कोई संग-ए-गिराँ हम-नफ़सो
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
छुपा के सो गई मुँह दिन में रहगुज़ार-ए-फ़िराक़
जो शब हुई तो ख़यालों का कारवाँ गुज़रा