आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sahuu.ngaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "sahuu.ngaa"
ग़ज़ल
फ़ना बुलंदशहरी
नज़्म
मैं क्या बनूँगा
कि मैं सच की ख़ातिर हर इक दुख सहूँगा
बड़ा हो के यारो सुनो क्या बनूँगा
अब्दुल मतीन नियाज़
समस्त
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "sahuu.ngaa"
ग़ज़ल
'नाज़िर' सहूँगा किस तरह सहरा की तेज़ धूप
राहों में साया-दार शजर चाहिए मुझे
मंज़ूर-उल-हक़ नाज़िर
ग़ज़ल
नक़्द-ए-जाँ माँगते ही उन के मैं दे दूँगा उन्हें
हर घड़ी का न सहूँगा ये तक़ाज़ा उन का
