आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "samajhnaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "samajhnaa"
नज़्म
रक़ीब से!
हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है
जुज़ तिरे और को समझाऊँ तो समझा न सकूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शेर
मोहब्बत को समझना है तो नासेह ख़ुद मोहब्बत कर
किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ाँ नहीं होता
ख़ुमार बाराबंकवी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "samajhnaa"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
me.n samajhnaa
में समझना میں سَمَجھنا
ध्यान करना, दिल में कुछ और सोचना
अन्य परिणाम "samajhnaa"
ग़ज़ल
मजरूह सुल्तानपुरी
ग़ज़ल
गुमाँ तो क्या यक़ीं भी वसवसों की ज़द में होता है
समझना संग-ए-दर को संग-ए-दर आसाँ नहीं होता
अदा जाफ़री
नज़्म
हिण्डोला
नए सिरे से समझना पड़ा है दुनिया को
बड़े जतन से सँभाला है ख़ुद को मैं ने नदीम
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
तुम यूँ ही समझना कि फ़ना मेरे लिए है
पर ग़ैब से सामान-ए-बक़ा मेरे लिए है
मौलाना मोहम्मद अली जौहर
ग़ज़ल
जिसे अपना समझना था वो आँख अब अपनी दुश्मन है
कि ये रोने से बाज़ आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ