aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "shab-e-vasl"
कहना किसी का सुब्ह-ए-शब-ए-वस्ल नाज़ सेहसरत तुम्हारी जान हमारी निकल गई
ग़ैरों को शब-ए-वस्ल बुलाने से ग़रज़मुश्ताक़ ज़माने को दिखाने से ग़रज़
शब-ए-वस्ल घबरा के कहना किसी काबता दीजिए हम से क्या कीजिएगा
दी शब-ए-वस्ल मोअज़्ज़िन ने अज़ाँ पिछली रातहाए कम-बख़्त को किस वक़्त ख़ुदा याद आया
बात करने की शब-ए-वस्ल इजाज़त दे दोमुझ को दम भर के लिए ग़ैर की क़िस्मत दे दो
लखनवी शाइ’री की तीसरी पीढ़ी के प्रमुख प्रतिनिधि शाइ’र। ख़्वाजा ‘आतिश’ के लाइक़ शागिर्द थे। अफ़ीम का शौक़ था, ख़ुद खाते और मेहमानों को खिलाते। वाजिद अ’ली शाह ने दो सौ रुपए माहवार वज़ीफ़ा बाँध रखा था, जिससे ऐश में गुज़रती थी।
शब-ए-वस्लشَبِ وَصْل
नायक और नायिका के मिलने की रात, मिलनरात्रि
शब-ए-वस्ल-ए-दो-'आलमشَبِ وَصْلِ دُو عَالَم
the night of the two world's union
Shab-e-Wasl
अब्दुल हलीम शरर
नज़्म
Annoor Val Baha Liasaneedal Hadis-e-Wa Salasilil Auliya
सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमद नूरी
Qaul-ul-Mukhtar Fi Masla-e-Jabr Wal Akhtiyar
हाफ़िज़ शाह अली अनवर
Tarjuma-e-Tareekh-e-Waqidi
मौलवी बशारत अली ख़ान
Fazail-e-Sahaba-wa-Ahl-e-Bait
अल्लामा सय्यद शाह तुराब-उल-हक़ क़ादरी
इस्लामियात
Faisla-e-Wahdat-ul-Wujood Wash-Shuhood
शाह वलीउल्लाह मोहद्दिस देहलवी
सूफीवाद दर्शन
शब-ए-वस्ल की क्या कहूँ दास्ताँज़बाँ थक गई गुफ़्तुगू रह गई
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ थाबग़ल में सनम था ख़ुदा मेहरबाँ था
शब-ए-वस्ल क्या मुख़्तसर हो गईज़रा आँख झपकी सहर हो गई
शब-ए-वस्ल है बहस हुज्जत अबसये शिकवे अबस ये शिकायत अबस
आँखों में हया उस के जब आई शब-ए-वस्लपलकों पे पलक उस ने गिराई शब-ए-वस्ल
शब-ए-वस्ल हम मुख़्तसर देखते हैंइधर आँख झपकी सहर देखते हैं
शब-ए-वस्ल ज़िद में बसर हो गईनहीं होते होते सहर हो गई
शब-ए-वस्ल क्या जाने क्या याद आयावो कुछ आप ही आप शर्मा रहे हैं
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