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ग़ज़ल
पुर्ज़े पुर्ज़े है तिरे हिज्र में पैराहन-ए-जाँ
मुझ में साँसों की तरह यूँ तिरे सदमात चले
मुज़म्मिल अब्बास शजर
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रेख़्ता शब्दकोश
fan-e-shajaarii
फ़न-ए-शजारी فَنِ شَجَاری
درخت لگانے کا فن یا مہارت ، باغ بانی .
shiir-o-shakar ho jaanaa
शीर-ओ-शकर हो जाना شِیر و شَکَر ہو جانا
बहुत दोस्ती होना, आपस में घुलना-मिलना, मिल-जुल जाना
hazaar haath kaa ban kar aa.e
हज़ार हाथ का बन कर आए ہَزار ہاتھ کا بَن کر آئے
कितना ही ऊँचा दर्जा ले कर आए, कितना ही भारी भरकम और माननीय बन कर आए
aise uut rivaa.Dii jaa.e.n aaTaa bech ke gaajar khaa.e.n
ऐसे ऊत रिवाड़ी जाएँ आटा बेच के गाजर खाएँ اَیسے اُوت رِواڑی جائیں آٹا بیچ کے گاجَر کھائیں
ऐसे मूर्ख के संबंध में प्रयुक्त जो अपनी सारी पूँजी खाने में ख़र्च कर दे या अच्छी वस्तु देकर ख़राब वस्तु ले
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ग़ज़ल
मैं नक़्द-ए-जान को भी शौक़ से रखूँ गिरवी
तुम्हारे क़ुर्ब के लम्हे अगर उधार मिलें
मुज़म्मिल अब्बास शजर
ग़ज़ल
कोई आज़ुर्दा करता है सजन अपने को हे ज़ालिम
कि दौलत-ख़्वाह अपना 'मज़हर' अपना 'जान-ए-जाँ' अपना
मज़हर मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ
ग़ज़ल
ख़ुद इश्क़ क़ुर्ब-ए-जिस्म भी है क़ुर्ब-ए-जाँ के साथ
हम दूर ही से उन को पुकार आए ये नहीं
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
ख़ाक-ए-दिल
अपना हर ख़्वाब-ए-जवाँ सौंप चला हूँ तुझ को
अपना सरमाया-ए-जाँ सौंप चला हूँ तुझ को
जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़ल
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया
जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
इत्तिहाद
दो शम्ओं' की लौ पेचाँ जैसे इक शो'ला-ए-नौ बन जाने की
दो धारें जैसे मदिरा की भरती हुइ किसी पैमाने की
जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़ल
आफ़त-ए-जाँ उस परी से दिल लगाना हो गया
उस को क्या चाहा कि इक दुश्मन ज़माना हो गया