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नज़्म
शिकस्त-ए-रंग
जब्र-ए-बे-रंगी का ख़म्याज़ा मुक़द्दर है
अगर यूँ अपने हाथों से लगाई मेहँदियों के रंग उड़ जाएँ
किश्वर नाहीद
ग़ज़ल
चश्म-ए-कम से देख मत क़ुमरी तो उस ख़ुश-क़द को टक
आह भी सर्द गुलिस्ताँ शिकस्त-ए-रंग है
मीर तक़ी मीर
कुल्लियात
चश्म-ए-कम से देख मत क़ुमरी तो उस ख़ुश-क़द को टक
आह भी सर्द गुलिस्ताँ शिकस्त-ए-रंग है
मीर तक़ी मीर
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ग़ज़ल
शिकस्त-ए-रंग-ए-मज़हब का असर देखें नए मुर्शिद
मुसलमानों में कसरत हो रही है बादा-नोशी की
अकबर इलाहाबादी
हिंदी ग़ज़ल
न शम्अ है न परवाने ये कैसा रंग-ए-महफ़िल है
कि मातम आ गया शहनाइयों तक तुम नहीं आए
बलबीर सिंह रंग
ग़ज़ल
शिकस्त-ए-जाम पे बुनियाद-ए-इशक़-ओ-मस्ती रख
शिकस्त-ए-रंग से कैफ़-ए-शराब पैदा कर
चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी
ग़ज़ल
असर ये है कि बुलबुल जब क़फ़स में करती है नाला
शिकस्त-ए-रंग-ए-गुल की बाग़ से आवाज़ आती है
रशीद लखनवी
ग़ज़ल
है बहार-ए-तेज़-रौ गुलगून-ए-निकहत पर सवार
यक शिकस्त-ए-रंग-ए-गुल सद-जुम्बिश-ए-महमेज़ है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
फ़ुर्सत-ए-आराम-ए-ग़श हस्ती है बोहरान-ए-अदम
है शिकस्त-ए-रंग-ए-इम्काँ गर्दिश-ए-पहलू मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
शिकस्त-ए-रंग-ए-रुख़ आइना-ए-बे-ताबी-ए-दिल है
ज़रा देखो तो क्यूँ कर ग़म-ज़दों का दम निकलता है
सफ़ी लखनवी
ग़ज़ल
नग़्मा होता है जवाँ रंग-ए-शिकस्त-ए-दिल से
आँख जब ख़ून से तर हो तो ग़ज़ल होती है
तुफ़ैल होशियारपुरी
ग़ज़ल
है सौ अदाओं से उर्यां फ़रेब-ए-रंग-ए-अना
बरहना होती है लेकिन हिजाब-ए-ख़्वाब के साथ