आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "tavaaf-e-ka.aba"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "tavaaf-e-ka.aba"
शेर
तवाफ़-ए-काबा-ए-दिल कर नियाज़-ओ-ख़ाकसारी सीं
वज़ू दरकार नईं कुछ इस इबादत में तयम्मुम कर
आबरू शाह मुबारक
ग़ज़ल
तवाफ़-ए-काबा-ओ-बुत-ख़ाना ला-हासिल समझते हैं
जो अपने दिल को हुस्न-ए-यार की मंज़िल समझते हैं
सय्यद वाजिद अली फ़र्रुख़ बनारसी
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
paajii ba-tavaaf-e-kaa'ba haajii name shavad
पाजी बा-तवाफ़-ए-का'बा हाजी नमे शवद پاجی بَہ طَوافِ کَعبَہ حاجی نَمے شَوَد
کمینہ آدمی کسی صورت میں شریف نہیں بن سکتا .
kaa'ba ho to us kii taraf mu.nh na karuu.n
का'बा हो तो उस की तरफ़ मुँह न करूँ کَعْبَہ ہو تو اُس کی طَرَف مُنْہ نَہ کَرُوں
किसी जगह से इस क़दर बेज़ार और तंग होना कि अगर वो जगह मुक़ाम मुक़द्दस और ख़ुदा का घर भी बिन जाये तो उधर का रुख़ ना करना ग़रज़ निहायत बेज़ार तंग और आजिज़ हो जाने के मौक़ा पर ये फ़िक़रा बोला जाता है
पुस्तकें के संबंधित परिणाम "tavaaf-e-ka.aba"
अन्य परिणाम "tavaaf-e-ka.aba"
नज़्म
दश्त-ए-तख़य्युल की नफ़ी
मुझे दश्त-ए-तख़य्युल का सफ़र करना अगर आता
तवाफ़-ए-काबा करता, ज़िंदगी को सम्त मिल जाती
कौसर मज़हरी
ग़ज़ल
'मुज़फ़्फ़र' ज़िंदगी में फ़र्ज़ तो इक बार था लेकिन
तवाफ़-ए-काबा-ए-दिल कर चुकी हैं बारहा आँखें
मुज़फ्फ़र अहमद मुज़फ्फ़र
हास्य
तवाफ़-ए-काबा पर जिस रोज़ होंगे शैख़ आमादा
उसी दिन उन का गिरजे में डिनर होगा तो क्या होगा
शौक़ बहराइची
ग़ज़ल
शाह नसीर
नअत
अगर लिखना तवाफ़-ए-का'बा-ए-अक़्दस मुक़द्दर में
तो मेरे नाम तैबा की सुनहरी शाम लिख देना
शमीम अंजुम वारसी
ग़ज़ल
तवाफ़-ए-का'बा बे-कैफ़िय्यत-ए-मय हो नहीं सकता
मिला लेते हैं थोड़ी सी अगर ज़मज़म भी पीते हैं
नुशूर वाहिदी
ग़ज़ल
तवाफ़-ए-काबा को देख तो ले तड़प रहा है वजूद मेरा
न पाँव अब मेरे उठ रहे हैं न सामने घर वो आ रहा है
रज़िया हलीम जंग
ग़ज़ल
कर चुका 'ऐशी' तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-का'बा का क़स्द
जब तलक हिन्दोस्ताँ का मय-कदा आबाद है