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ग़ज़ल
आओ 'नादाँ' आज उस नासूर का मातम करें
जो ख़िराज-ए-ज़िंदगी ले कर भी हम को खा गया
इंद्र सुरूप दत्त नादान
ग़ज़ल
वो दिन भी कोई दूर नहीं ऐ दिल-ए-‘नादाँ’
ये तोहमतें भी होंगी मिरी ज़ात का ज़ेवर
इंद्र सुरूप दत्त नादान
शेर
शोख़ी-ए-हुस्न के नज़्ज़ारे की ताक़त है कहाँ
तिफ़्ल-ए-नादाँ हूँ मैं बिजली से दहल जाता हूँ
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
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नज़्म
नए साल की बंद मुट्ठी
फ़क़त तिफ़्ल-ए-नादाँ की मानिंद हम
उस की मुट्ठी में पोशीदा अहकाम के पेश हैं चुप कपड़े
नसीम मुज़फ्फ़रपुरी
ग़ज़ल
शिकस्त-ओ-फ़त्ह का ज़िम्मा नहीं दिल-ए-नादाँ
लड़े हज़ार में ये काम है सिपाही का
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
दिल-ए-नादाँ अभी ख़ूगर नहीं ये ग़म उठाने का
उठेगी तेरे दर से ये जबीं आहिस्ता आहिस्ता
रुख़्साना निकहत लारी उम्म-ए-हानी
ग़ज़ल
वक़्त के नादाँ परिंदे ज़ोम-ए-दानाई के गिर्द
ख़ूब-सूरत ख़्वाहिशों के दाम ले कर आए हैं
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
शिद्दत-ए-ज़ब्त की लज़्ज़त को घटा देती हैं
आँखें नादान हैं क्यों अश्क बहा देती हैं
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
उद्धरण
किसी दाना या नादान का मक़ूला है कि झूट के तीन दर्जे हैं। झूट, सफ़ेद झूट और आ'दाद-ओ-शुमार।...
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
शाख़-ए-गुल जुम्बिश में है गहवारा-आसा हर नफ़स
तिफ़्ल-ए-शोख़-ए-ग़ुंचा-ए-गुल बस-कि है वहशी-मिज़ाज
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
यूँ लगा रखी है दिल से ज़िंदगी की आरज़ू
जैसे तिफ़्ल-ए-जाँ-ब-लब मज़दूर की आग़ोश में
अब्ब्दुर्रऊफ़ शाहिद अंसारी
कुल्लियात
गया नज़र से जो वो गर्म तिफ़्ल-ए-आतिश-बाज़
हम अपने चेहरे पे उड़ती हवाइयाँ देखीं