aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tuluu-e-shaam"
इक पल में ही बतला गईं दम तोड़ती किरनेंवो राज़ जो ऐ 'शाम' न पाया मुझे दिन-भर
कुछ तो कहती है सर-ए-शाम समुंदर की हवाकभी साहिल की ख़ुनुक रेत पे जाएँ तो सही
हो गया तार तार हर मंज़र'शाम' चाक-ए-नज़र सिया जाए
रुक गया वक़्त पलट आई हैं बीती सदियाँयही वो लम्हा है जब 'शाम' बिखरना है मुझे
यादें खुले किवाड़ ये महकी हुई फ़ज़ाकौन आ रहा है शाम ये ठंडी हवा के ब'अद
'उलू-ए-शानعُلُوِ شان
being high in dignity and rank
Tulu-e-Shaam
अहमद रिज़वान
काव्य संग्रह
तुलू-ए-शाम
तुलू-ए-शम्स
शम्सुल हक़ निज़ामी
Tareekh-e-Nadwa-tul-Ulama
शम्स तबरेज़ ख़ाँ
इतिहास
इक इक पलक पे छाई है महरूमियों की शामज़ब्त-ए-सुख़न की आग में जलते लबों को देख
मैं हूँ शिकार-ए-फ़ित्ना-ए-एहसास-ए-रंग 'शाम'किस तरह एक जिस्म की तक़्सीम हो गई
तमाम जुस्तुजू-ए-शौक़ राएगाँ ऐ 'शाम'मुझे ख़बर है पस-ए-इंतिज़ार क्या होगा
इस सफ़र में भी मुझे ऐ 'शाम' मायूसी मिलीख़्वाहिशें कट कर गिरीं महरूमियों की धार से
अक्सर हुआ ऐसा कि भरे घर में सर-ए-शामतन्हाई के आसेब दर-ओ-बाम से बरसे
हर एक सम्त उदासी की तितलियाँ जागींतुलू-ए-शाम से पहले सियाहियाँ जागीं
तिरे ख़याल का जब सेहन-ए-दिल में चाँद खिलेउदास शाम को मंज़र सा कुछ नया भी दे
अभी तो दिन है अभी तख़्त-ए-आसमाँ पे चमकतुलू-ए-शाम के साथ आफ़्ताब ढलते हैं
तुलू-ए-सुब्ह से पहले ग़ुरूब-ए-शाम के बादठहर गई मिरे सीने में रात चलती हुई
सब अपने अपने उफ़ुक़ पर चमक के थोड़ी देरमुझे तो दामन-ए-शाम-ओ-सहर की गर्द हुए
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books