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ग़ज़ल
यूँ तो अंदाज़-ए-बयाँ हैं दिल-नशीं सब के मगर
इक नए अंदाज़ में अफ़्कार-ए-हमदम देखिए
हमदम सिद्दीकी
नज़्म
मिर्ज़ा 'ग़ालिब'
गेसू-ए-उर्दू अभी मिन्नत-पज़ीर-ए-शाना है
शम्अ ये सौदाई-ए-दिल-सोज़ी-ए-परवाना है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आरज़ू राहिबा है
बे-कराँ इज्ज़ की जाँ-सोख़्ता वीरानी में
जिस में उगते नहीं दिल-सोज़ि-ए-इंसाँ के गुलाब
नून मीम राशिद
ग़ज़ल
जो रहा ख़ुद्दार होने पर ख़ुदी से दूर दूर
वो दयार-ए-इश्क़ ओ दिल-सोज़ी का वाली हो गया
दत्तात्रिया कैफ़ी
ग़ज़ल
निगाह-ए-नाज़ में दिल-सोज़ी-ए-नियाज़ कहाँ
ये आश्ना-ए-नज़र हैं दिलों के बेगाने
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
ग़ज़ल
अगर दिल वाक़िफ़-ए-नैरंगी-ए-तब-ए-सनम होता
ज़माने की दो-रंगी का उसे हरगिज़ न ग़म होता
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल
बका-ए-जावेदाँ के राज़ से वाक़िफ़ नहीं ऐ दिल
जिन्हें राह-ए-वफ़ा में ख़ाक हो जाना नहीं आता