aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "vikaas"
विकास शर्मा राज़
born.1973
शायर
शहाब जाफ़री
1930 - 2000
विकास जोशी वाहिद
born.1965
विकास राना
विलास पंडित मुसाफ़िर
डॉ कविता विकास
born.1964
विकास सहज
born.1998
वक़ास यूसुफ़
born.1999
कुमार विकास
अहमद वक़ास
born.1984
वक़ास अज़ीज़
born.1988
अहमद वक़ास महरवी
born.1990
विकास शाह मुसाफ़िर
born.2003
विकास नसीब
born.1982
गिरिजा व्यास
मुझ को अक्सर उदास करती हैएक तस्वीर मुस्कुराती हुई
इरादा तो नहीं है ख़ुद-कुशी कामगर मैं ज़िंदगी से ख़ुश नहीं हूँ
एक बरस और बीत गयाकब तक ख़ाक उड़ानी है
मुद्दतें हो गईं हिसाब किएक्या पता कितने रह गए हैं हम
कौन तहलील हुआ है मुझ मेंमुंतशिर क्यूँ हैं अनासिर मेरे
विकास وِکاس
अपने आपको प्रकट या व्यक्त करना, फैलना या बढना, बिकास, प्रसार, फैलाव
विक़ा' وِقاع
युद्ध, लड़ाई, जंग
बिकस بِکَس
helpless
विकट وِکَٹ
घमंड से भरा हुआ, दर्पयुक्त
उर्दू साहित्य के विकास में बिहारी विभूतियो का योगदान
डॉ. विजय कुमार
Lucknow Mahotsav 2006
अननोन ऑथर
सांस्कृतिक इतिहास
विलास यात्रा
कुमार पाशी
नज़्म
Shiri Samta Vilas
देव मंगत राम जी महाराज
हिन्दू-मत
सीप समुंदर मोती
काव्य संग्रह
Al-Waqqas
अब्दुर रज़़्जाक़ आरिफ़ जबलपुरी
इस्लामियात
Leechi
नारायण दूली चन्द वियास
Aqwam-e-Sharq Da Wichar
अहमद हुसैन क़ुरैशी क़िलादारी
Makateeb-e-Nawwab Mohsin-ul-Mulk Mehdi Ali Khan wa Nawwab Viqar-ul-Mulk Mushtaq Husain Khan
मोहम्मद अमीन ज़ुबेरी
पत्र
Tarjuma-e-Vichar Sagar
Viqar
जमीलुर्रहमान मंगलौरी
Rahiman Vilas
ब्रज रतनदास
शायरी तन्क़ीद
Sri Vichar Sagar
Phalon Ki Kheti Aur Tijarat
Aadarsh Vichar
हकीम हरि राम
मेरी कोशिश तो यही है कि ये मा'सूम रहेऔर दिल है कि समझदार हुआ जाता है
ऐसी प्यास और ऐसा सब्रदरिया पानी पानी है
ये सदा काश उसी ने दी होइस तरह वो ही बुलाता है मुझे
रफ़्ता रफ़्ता क़ुबूल होंगे उसेरौशनी के लिए नए हैं हम
तू भी नाराज़ बहुत है मुझ सेज़िंदगी तुझ से ख़फ़ा हूँ मैं भी
फ़क़त ज़ंजीर बदली जा रही थीमैं समझा था रिहाई हो गई है
कर्ब में क़हक़हे लगाता हूँइतनी वहशत कहाँ से लाता हूँ
मोहब्बत के आदाब सीखो ज़राउसे जान कह कर पुकारा करो
यहाँ तक कर लिया मसरूफ़ ख़ुद कोअकेली हो गई तन्हाई मेरी
देखना चाहता हूँ गुम हो करक्या कोई ढूँड के लाता है मुझे
इश्क़ बीनाई बढ़ा देता हैजाने क्या क्या नज़र आता है मुझे
जिन का सूझा न कुछ जवाब हमेंउन सवालों पे हँस दिए हम लोग
हवा के साथ यारी हो गई हैदिये की उम्र लम्बी हो गई है
हाए इज़हार कर के पछताएउस को इक दोस्त की ज़रूरत थी
मिरी उरूज की लिक्खी थी दास्ताँ जिस मेंमिरे ज़वाल का क़िस्सा भी उस किताब में था
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