aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "भँवर"
अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँमैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ
भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझोकहाँ तक चलोगे किनारे किनारे
ज़ुल्फ़ें सीना नाफ़ कमरएक नदी में कितने भँवर
न जी भर के देखा न कुछ बात कीबड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
किस क़दर यादें उभर आई हैं तेरे नाम सेएक पत्थर फेंकने से पड़ गए कितने भँवर
हवा-ए-ज़ुल्म सोचती है किस भँवर में आ गईवो इक दिया बुझा तो सैंकड़ों दिए जला गया
मेरे अपने अंदर एक भँवर था जिस मेंमेरा सब कुछ साथ ही मेरे डूब गया है
रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं मेंहम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिया पाँव में
डुबो रहा है मुझे डूबने का ख़ौफ़ अब तकभँवर के बीच हूँ दरिया के पार होते हुए
दूर तक एक स्याही का भँवर आएगाख़ुद में उतरोगे तो ऐसा भी सफ़र आएगा
मैं ने देखा था सहारे के लिए चारों तरफ़कि मिरे पास ही इक हाथ भँवर से निकला
वही हुआ कि मैं आँखों में उस की डूब गयावो कह रहा था भँवर का पता नहीं चलता
ख़याल-ए-नाफ़-ए-बुताँ से हो क्यूँ कि दिल जाँ-बरनिकलते कोई भँवर से न डूबता देखा
भँवर जब भी किसी मजबूर कश्ती को डुबोता हैतो अपनी बेबसी पर दूर से साहिल तड़पता है
महसूस कर लिया था भँवर की थकान कोयूँही तो ख़ुद को रक़्स पे माइल नहीं किया
हवाएँ रोक न पाईं भँवर डुबो न सकेवो एक नाव जो अज़्म-ए-सफ़र के बा'द चली
हर तरफ़ ख़ूनीं भँवर हर सम्त चीख़ों के अज़ाबमौज-ए-गुल भी अब के दोज़ख़ की हवा से कम न थी
पिस्ताँ हैं हबाब और शिकम बहर-ए-लताफ़तमौजें हैं बटें पेट की दरिया का भँवर नाफ़
भँवर से ये जो मुझे बादबान खींचता हैज़रूर कोई हवाओं के कान खींचता है
लब-ए-दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली काभँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में
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