aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "'Ata"
तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सामुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाममुझे तो और कोई काम भी नहीं आता
जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम परहँस के कहने लगा और आप को आता क्या है
नशा पिला के गिराना तो सब को आता हैमज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथजाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आतातुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
मोहब्बत में बिछड़ने का हुनर सब को नहीं आताकिसी को छोड़ना हो तो मुलाक़ातें बड़ी करना
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोईतुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
सदा ऐश दौराँ दिखाता नहींगया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
बस जान गया मैं तिरी पहचान यही हैतू दिल में तो आता है समझ में नहीं आता
उसे क्यूँ हम ने दिया दिल जो है बे-मेहरी में कामिल जिसे आदत है जफ़ा कीजिसे चिढ़ मेहर-ओ-वफ़ा की जिसे आता नहीं आना ग़म-ओ-हसरत का मिटाना जो सितम में है यगाना
छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता थापर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्ही से सीखा
वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगेजिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है
कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवाहसरत-ए-दीदार ने आँखों को अंधा कर दिया
वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जातामगर इन एहतियातों से तअल्लुक़ मर नहीं जाता
वफ़ा की कौन सी मंज़िल पे उस ने छोड़ा थाकि वो तो याद हमें भूल कर भी आता है
छोड़ने मैं नहीं जाता उसे दरवाज़े तकलौट आता हूँ कि अब कौन उसे जाता देखे
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता हैवो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता
मैं भी उसे खोने का हुनर सीख न पायाउस को भी मुझे छोड़ के जाना नहीं आता
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