aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदनदेखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं
किसी का अहद-ए-जवानी में पारसा होनाक़सम ख़ुदा की ये तौहीन है जवानी की
कुछ न पूछो 'फ़िराक़' अहद-ए-शबाबरात है नींद है कहानी है
जिस अहद में लुट जाए फ़क़ीरों की कमाईउस अहद के सुल्तान से कुछ भूल हुई है
असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझेकहाँ गया मिरा बचपन ख़राब कर के मुझे
जिन को दौलत हक़ीर लगती हैउफ़ वो कितने अमीर होते हैं
जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करेंबच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए
इक अदा मस्ताना सर से पाँव तक छाई हुईउफ़ तिरी काफ़िर जवानी जोश पर आई हुई
मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बतजहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है
ता फिर न इंतिज़ार में नींद आए उम्र भरआने का अहद कर गए आए जो ख़्वाब में
रोए बग़ैर चारा न रोने की ताब हैक्या चीज़ उफ़ ये कैफ़ियत-ए-इज़्तिराब है
तुम्हारे अहद-ए-वफ़ा को मैं अहद क्या समझूँमुझे ख़ुद अपनी मोहब्बत पे ए'तिबार नहीं
इक और तीर चला अपना अहद पूरा करअभी परिंदे में थोड़ी सी जान बाक़ी है
मेरे लिए जीने का सहारा है अभी तकवो अहद-ए-तमन्ना कि तुम्हें याद न होगा
पुराने अहद में भी दुश्मनी थीमगर माहौल ज़हरीला नहीं था
किया था अहद जब लम्हों में हम नेतो सारी उम्र ईफ़ा क्यूँ करें हम
मैं ने जिन के लिए राहों में बिछाया था लहूहम से कहते हैं वही अहद-ए-वफ़ा याद नहीं
मज़ा है अहद-ए-जवानी में सर पटकने कालहू में फिर ये रवानी रहे रहे न रहे
अहद-ए-जवानी रो रो काटा पीरी में लीं आँखें मूँदयानी रात बहुत थे जागे सुब्ह हुई आराम किया
इस से बढ़ कर कोई इनआम-ए-हुनर क्या है 'फ़राज़'अपने ही अहद में एक शख़्स फ़साना बन जाए
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