aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "بار_بار"
वा'दा क्यूँ बार बार करते होख़ुद को बे-ए'तिबार करते हो
आप करते हैं बार बार नहींहम को हाँ का भी ए'तिबार नहीं
क्यूँ चमक उठती है बिजली बार बारऐ सितमगर ले न अंगड़ाई बहुत
आती है बात बात मुझे बार बार यादकहता हूँ दौड़ दौड़ के क़ासिद से राह में
सहरा से बार बार वतन कौन जाएगाक्यूँ ऐ जुनूँ यहीं न उठा लाऊँ घर को मैं
यूँ बार बार मुझ को सदाएँ न दीजिएअब वो नहीं रहा हूँ कोई दूसरा हूँ मैं
सूरत न यूँ दिखाए उन्हें बार बार चाँदपैदा करे हसीनों में कुछ ए'तिबार चाँद
ख़ुदा करे कि ये दिन बार बार आता रहेऔर अपने साथ ख़ुशी का ख़ज़ाना लाता रहे
देखा किए वो मस्त निगाहों से बार बारजब तक शराब आई कई दौर हो गए
आइने का सामना अच्छा नहीं है बार बारएक दिन अपनी ही आँखों में खटक सकता हूँ मैं
खिड़की तो 'शाज़' बंद मैं करता हूँ बार बारलेकिन हवा-ए-शौक़ कि ज़िद पर अड़ी रहे
क्यूँ हाथ दिल से लगाते हो बार बार अपनाक्या दिल में अब भी कोई बे-नज़ीर रहता है
'ग़ालिब' न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर
तेरी ही सैर के लिए आता रहूँगा बार बारतेरा था सात दिन का शौक़ मेरी है उम्र भर की सैर
आती है याद सुब्ह-ए-मसर्रत की बार बारख़ुर्शीद आते आते उसे कल उठा तो ला
लब-ए-ख़िरद से यही बार बार निकलेगानिकालने ही से दिल का ग़ुबार निकलेगा
जी चाहता है तर्क-ए-मोहब्बत को बार बारआता है एक ऐसा भी लम्हा विसाल में
दे रहे हैं लोग मेरे दिल पे दस्तक बार बारदिल मगर ये कह रहा है सिर्फ़ तू और सिर्फ़ तू
देता है मुझ को चर्ख़-ए-कुहन बार बार दाग़उफ़ एक मेरा सीना है उस पर हज़ार दाग़
आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बारलब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
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