aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "उचट"
कहीं पे दस्त-ए-निगारीं कहीं लब-ए-ल'अलींवो सोते सोते मिरी नींद का उचट जाना
कुछ भँवर यूँ उचट पड़े थे ज्यूँख़ुद-कुशी पर हो कोई आमादा
उलट रही थीं हवाएँ वरक़ वरक़ उस कालिखी गई थी जो मिट्टी पे वो किताब था वो
ये काएनात मिरे सामने है मिस्ल-ए-बिसातकहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
ज़रा नक़ाब-ए-हसीं रुख़ से तुम उलट देनाहम अपने दीदा-ओ-दिल का ग़ुरूर देखेंगे
लगी थी जान की बाज़ी बिसात उलट डालीये खेल भी हमें यारों ने हारने न दिया
अफ़्सोस है कि बख़्त हमारा उलट गयाआता तो था पे देख के हम कूँ पलट गया
टहनी पे ख़मोश इक परिंदामाज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
अगर देखे तुम्हारी ज़ुल्फ़ ले डसउलट जावे कलेजा नागनी का
आँखों में मेरी सुब्ह-ए-क़यामत गई झमकसीने से उस परी के जो पर्दा उलट गया
मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलटतज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच
हम ने मुद्दत से उलट रक्खा है कासा अपनादस्त-ए-दादार तिरे दिरहम-ओ-दीनार पे ख़ाक
हमारे पास यही शाइ'री का सिक्का हैउलट-पलट के इसी को चलाना पड़ता है
बुर्क़ा को उलट मुझ से जो करता है वो बातेंअब मैं हमा-तन-गोश बनूँ या हमा-तन-चश्म
मैं बाहर से उचक कर देखता हूँमिरे अंदर तमाशा हो रहा है
फ़लक का थाल ही हम ने उलट डाला ज़मीं परतुम्हारी तरह का कोई सितारा ढूँडने में
वरक़ उलट दिया करता है बे-ख़याली मेंवो शख़्स जब मिरा चेहरा किताब होता है
कुछ हुस्न के फ़साने तरतीब दे रहा हूँदफ़्तर उलट रहा हूँ हर फूल हर कली का
अजब है आलम अजब है मंज़र कि सकता में है ये चश्म-ए-हैरतनक़ाब उलट कर वो आ गए हैं तो आइने गुनगुना रहे हैं
यक्का उलट के रह गया घोड़ा भड़क गयाकाली सड़क पे चाँद सा चेहरा चमक गया
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books