aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "जलना"
रात-भर ख़्वाब में जलना भी इक बीमारी हैइश्क़ की आग से बचने में समझदारी है
मुसलसल धूप में चलना चराग़ों की तरह जलनाये हंगामे तो मुझ को वक़्त से पहले थका देंगे
ये रौशनी यूँही आग़ोश में नहीं आतीचराग़ बन के मुंडेरों पे जलना पड़ता है
रात उस बज़्म में तस्वीर के मानिंद थे हमहम से पूछे तो कोई शम्अ का जलना क्या था
शम्अ की तरह से जलना सीख औरों के लिएगर तमन्ना दिल में है तो रौनक़-ए-महफ़िल बने
हुनूज़ रात है जलना पड़ेगा उस को भीकि मेरे साथ पिघलना पड़ेगा उस को भी
हमीं बुझाते हैं लौ पहले सब चराग़ों कीफिर इन चराग़ों के हिस्से का जलना पड़ता है
ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजेइक आग का दरिया है और डूब के जाना है
हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँदो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जानादर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है 'अमीर'क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछभूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता हैचले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है
शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों कोख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का
यूँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जानाजिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
हमारी मुस्कुराहट पर न जानादिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सहीहो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिनबैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए
कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँफिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
अपने जलने में किसी को नहीं करते हैं शरीकरात हो जाए तो हम शम्अ बुझा देते हैं
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