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शेर
हमारी ज़िंदगी पर मौत भी हैरान है 'ग़ाएर'
न जाने किस ने ये तारीख़-ए-पैदाइश निकाली है
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
शेर
हमारी ज़िंदगी पर मौत भी हैरान है ग़ाएर
न जाने किस ने ये तारीख़-ए-पैदाइश निकाली है
काशिफ़ हुसैन ग़ाएर
शेर
फ़ारूक़ बाँसपारी
शेर
तिरी तारीफ़ हो ऐ साहिब-ए-औसाफ़ क्या मुमकिन
ज़बानों से दहानों से तकल्लुम से बयानों से
कल्ब-ए-हुसैन नादिर
शेर
ये पैदा होते ही रोना सरीहन बद-शुगूनी है
मुसीबत में रहेंगे और मुसीबत ले के उट्ठेंगे
मुज़्तर ख़ैराबादी
शेर
पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे
रोना ख़ुद अपने हाल पे ये ज़ार ज़ार क्या
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
शेर
कूचा-ए-ज़ुल्फ़ में फिरता हूँ भटकता कब का
शब-ए-तारीक है और मिलती नहीं राह कहीं
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
शेर
उस ने की पहले-पहल पैमाइश-ए-सहरा-ए-नज्द
क़ैस है दर-अस्ल इक मशहूर पनवाड़ी का नाम
सय्यद ज़मीर जाफ़री
शेर
ऐ फ़लक तुझ को क़सम है मिरी इस को न बुझा
कि ग़रीबों को चराग़-ए-शब-ए-तारीक है दिल
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
शेर
ये जज़्र-ओ-मद है पादाश-ए-अमल इक दिन यक़ीनी है
न समझो ख़ून-ए-इंसाँ बह गया है राएगाँ हो कर
सिराज लखनवी
शेर
मक़ाम-ए-ज़ब्त ग़म-ए-इश्क़ में वो पैदा कर
कि तू ख़ुशी को न तरसे तुझे ख़ुशी तरसे