आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "दिलकशी"
शेर के संबंधित परिणाम "दिलकशी"
शेर
दिल-कशी तेरे तसव्वुर की रही रोज़-अफ़्ज़ूँ
बाहमी रब्त का हर चंद वो नक़्शा न रहा
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "दिलकशी"
दिल-कशी तेरे तसव्वुर की रही रोज़-अफ़्ज़ूँ
बाहमी रब्त का हर चंद वो नक़्शा न रहा
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here