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शेर
शाद अज़ीमाबादी
शेर
मैं तो हिजाब में भी तुझे देखता रहा
पर्दा उठा के क्यूँ मिरी मिट्टी ख़राब की
सर फ्लोरेंस फेलिज़ मतलूब
शेर
मुझ को अग़वा कर लिया है मेरे ख़्वाबों ने 'नबील'
और मिरी आँखें उन्हें मतलूब हैं तावान में
अज़ीज़ नबील
शेर
गर है दुनिया की तलब ज़ाहिद-ए-मक्कार से मिल
दीं है मतलूब तो इस तालिब-ए-दीदार से मिल
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
शेर
मोती पिरो के ज़ुल्फ़ में अख़्तर बना दिए
तू ने अँधेरी रात में तारे दिखा दिए
सर फ्लोरेंस फेलिज़ मतलूब
शेर
न पाने से किसी के है न कुछ खोने से मतलब है
ये दुनिया है इसे तो कुछ न कुछ होने से मतलब है
वसीम बरेलवी
शेर
हम तो रात का मतलब समझें ख़्वाब, सितारे, चाँद, चराग़
आगे का अहवाल वो जाने जिस ने रात गुज़ारी हो