aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "लगने"
मुझे अब तुम से डर लगने लगा हैतुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या
देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब सेचेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से
बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहींलगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं
बस ज़रा इक आइने के टूटने की देर थीऔर मैं बाहर से अंदर की तरह लगने लगा
ये तो अब इश्क़ में जी लगने लगा है कुछ कुछइस तरफ़ पहले-पहल घेर के लाया गया मैं
'ज़ेब' मुझे डर लगने लगा है अपने ख़्वाबों सेजागते जागते दर्द रहा करता है मिरे सर में
वो एक शख़्स जो दिखने में ठीक-ठाक सा थाबिछड़ रहा था तो लगने लगा हसीन बहुत
हम बड़े अहल-ए-ख़िरद बनते थे ये क्या हो गयाअक़्ल का हर मशवरा दीवाना-पन लगने लगा
हवा भी इश्क़ की लगने न देता मैं उसे हरगिज़अगर इस दिल पे होता हाए कुछ भी इख़्तियार अपना
ये आग लगने से पहले की बाज़-गश्त है जोबुझाने वालों को अब तक धुआँ बुलाता है
दिल पर तेरी चुप से लगने वाला दाग़ऐसा दाग़ है जिस को धो नहीं सकता मैं
आँख लगने न पाई सहर हो गईज़िंदगी बे-इरादा बसर हो गई
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैंकिसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगेमैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस मेंहर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ साजो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे
साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिनतूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
यूँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जानाजिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books