aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "लम्हा"
न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आएख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए
मुझे भी लम्हा-ए-हिजरत ने कर दिया तक़्सीमनिगाह घर की तरफ़ है क़दम सफ़र की तरफ़
उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात मेंएक लम्हा ज़िंदगी भर की कमाई खा गया
ये लम्हा लम्हा तकल्लुफ़ के टूटते रिश्तेन इतने पास मिरे आ कि तू पुराना लगे
ये लम्हा लम्हा ज़िंदा रहने की ख़्वाहिश का हासिल हैकि लहज़ा लहज़ा अपने आप ही में मर रहा हूँ मैं
दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हमइतने मजबूर रहे हैं कभी हालात से हम
इक ख़ौफ़-ए-बे-पनाह है आँखों के आर-पारतारीकियों में डूबता लम्हा है सामने
वक़्त से लम्हा लम्हा खेली हैज़िंदगी इक अजब पहेली है
है एक ही लम्हा जो कहीं वस्ल कहीं हिज्रतकलीफ़ किसी के लिए आराम किसी का
लम्हा लम्हा रोज़ सँवरने वाला तूलम्हा लम्हा लम्हा रोज़ बिखरने वाला मैं
मसीह-ओ-ख़िज़्र की उम्रें निसार हों उस परवो एक लम्हा जो यारों के दरमियाँ गुज़रे
किसी भी वक़्त बदल सकता है लम्हा कोईइस क़दर ख़ुश भी न हो मेरी परेशानी पर
वो लम्हा जब मिरे बच्चे ने माँ पुकारा मुझेमैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
तर्क-ए-तअल्लुक़ात को इक लम्हा चाहिएलेकिन तमाम उम्र मुझे सोचना पड़ा
मुआफ़ कर न सकी मेरी ज़िंदगी मुझ कोवो एक लम्हा कि मैं तुझ से तंग आया था
ये सच है रंग बदलता था वो हर इक लम्हामगर वही तो बहुत कामयाब चेहरा था
हर लम्हा अगर गुरेज़-पा हैतू क्यूँ मिरे दिल में बस गया है
ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसूख़ुशी का लम्हा कोई याद आ गया होगा
हुदूद-ए-वक़्त से बाहर अजब हिसार में हूँमैं एक लम्हा हूँ सदियों के इंतिज़ार में हूँ
लम्हा इतनी गुंजाइश रखता है ख़ुद मेंआप उस में आने से पहले जा सकते हैं
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