aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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दूर ख़ामोश बैठा रहता हूँइस तरह हाल दिल का कहता हूँ
आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद हैराग है मय है चमन है दिलरुबा है दीद है
तुम्हारे लोग कहते हैं कमर हैकहाँ है किस तरह की है किधर है
तुम नज़र क्यूँ चुराए जाते होजब तुम्हें हम सलाम करते हैं
क़ौल 'आबरू' का था कि न जाऊँगा उस गलीहो कर के बे-क़रार देखो आज फिर गया
जलता है अब तलक तिरी ज़ुल्फ़ों के रश्क सेहर-चंद हो गया है चमन का चराग़ गुल
बोसाँ लबाँ सीं देने कहा कह के फिर गयाप्याला भरा शराब का अफ़्सोस गिर गया
जो लौंडा छोड़ कर रंडी को चाहेवो कुइ आशिक़ नहीं है बुल-हवस है
अफ़्सोस है कि बख़्त हमारा उलट गयाआता तो था पे देख के हम कूँ पलट गया
ख़ुदावंदा करम कर फ़ज़्ल कर अहवाल पर मेरेनज़र कर आप पर मत कर नज़र अफ़आल पर मेरे
यूँ 'आबरू' बनावे दिल में हज़ार बातेंजब रू-ब-रू हो तेरे गुफ़्तार भूल जावे
क्या सबब तेरे बदन के गर्म होने का सजनआशिक़ों में कौन जलता था गले किस के लगा
अगर देखे तुम्हारी ज़ुल्फ़ ले डसउलट जावे कलेजा नागनी का
मुफ़्लिसी सीं अब ज़माने का रहा कुछ हाल नईंआसमाँ चर्ख़ी के जूँ फिरता है लेकिन माल नईं
नमकीं गोया कबाब हैं फीके शराब केबोसा है तुझ लबाँ का मज़े-दार चटपटा
बोसे में होंट उल्टा आशिक़ का काट खायातेरा दहन मज़े सीं पुर है पे है कटोरा
उस वक़्त जान प्यारे हम पावते हैं जी सालगता है जब बदन से तैरे बदन हमारा
यारो हमारा हाल सजन सीं बयाँ करोऐसी तरह करो कि उसे मेहरबाँ करो
उस वक़्त दिल पे क्यूँके कहूँ क्या गुज़र गयाबोसा लेते लिया तो सही लेक मर गया
दिखाई ख़्वाब में दी थी टुक इक मुँह की झलक हम कूँनहीं ताक़त अँखियों के खोलने की अब तलक हम कूँ
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