aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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ये सानेहा भी बड़ा अजब है कि अपने ऐवान-ए-रंग-ओ-बू मेंहैं जम्अ सब महर ओ माह ओ अंजुम पता नहीं फिर भी रौशनी का
यूँ दिल है सर-ब-सज्दा किसी के हुज़ूर मेंजैसे कि ग़ोता-ज़न हो कोई बहर-ए-नूर में
हम बे-नियाज़ बैठे हुए उन की बज़्म मेंऔरों की बंदगी का असर देखते रहे
लोग औरों के गरेबाँ पे नज़र करते हैंहम यही काम ब-अंदाज़-ए-दिगर करते हैं
मैं ऐसे हुस्न-ए-ज़न को ख़ुदा मानता नहींआहों के एहतिजाज से जो मावरा रहे
बे-तकल्लुफ़ वो औरों से हैंनाज़ उठाने को हम रह गए
हमें ख़बर है ज़न-ए-फ़ाहिशा है ये दुनियासो हम भी साथ इसे बे-निकाह रखते हैं
तुझ हिज्र की अगन कूँ बूझाने ऐ संग दिलकोई आब-ज़न-रफ़ीक़ ब-जुज़ चश्म-ए-तर नहीं
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