aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aa.nkh"
आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगावक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइलजब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ीख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़
आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगाजाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा
तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिनज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखोज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
अब दिल की तमन्ना है तो ऐ काश यही होआँसू की जगह आँख से हसरत निकल आए
इक हसीं आँख के इशारे परक़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
आँख रहज़न नहीं तो फिर क्या हैलूट लेती है क़ाफ़िला दिल का
क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकताआँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता
एक सूरज था कि तारों के घराने से उठाआँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा
आँख से आँख जब नहीं मिलतीदिल से दिल हम-कलाम होता है
वो पूछता था मिरी आँख भीगने का सबबमुझे बहाना बनाना भी तो नहीं आया
क्यूँ मेरी तरह रातों को रहता है परेशाँऐ चाँद बता किस से तिरी आँख लड़ी है
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैंसो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुईख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई
फिर मिरी आँख हो गई नमनाकफिर किसी ने मिज़ाज पूछा है
ज़ाहिर की आँख से न तमाशा करे कोईहो देखना तो दीदा-ए-दिल वा करे कोई
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