aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aapse"
वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिनउसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसेतेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत हैकभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसेवो यार बा-वफ़ा न सही बेवफ़ा तो है
मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहासब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो हैक्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगाइतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा
वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाएऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता
अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगीतू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों कोअपने अंदाज़ से गँवाने का
किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देतेसवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया हैउसे गले से लगाए ज़माना हो गया है
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न थासामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
याद उसे इंतिहाई करते हैंसो हम उस की बुराई करते हैं
मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देनायक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है
ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझहम अपने शहर में होते तो घर गए होते
ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिबलोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं
जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ललेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैंरुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
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