aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "abul-bashar"
ये इज्ज़ है कि क़नाअत है कुछ नहीं खुलताबहुत दिनों से वो ख़ैर-ओ-ख़बर से बाहर है
हर चीज़ की होती है कोई आख़िरी हद भीक्या कोई बिगाड़ेगा किसी ख़ाक-बसर का
हमें तो शम्अ के दोनों सिरे जलाने हैंग़ज़ल भी कहनी है शब को बसर भी करना है
बहार हो कि मौज-ए-मय कि तब्अ की रवानियाँजिधर से वो गुज़र गए उबल पड़ीं जवानियाँ
फ़स्ल-ए-बहार सेहन-ए-चमन यार-ए-मय-ब-कफ़क्यूँ ज़ाहिदो हराम है पीना शराब का
बे-रब्ती-ए-हयात का मंज़र भी देख लेथोड़ा सा अपनी ज़ात के बाहर भी देख ले
हर दिल-फ़रेब चीज़ नज़र का ग़ुबार हैआँखें हसीन हों तो ख़िज़ाँ भी बहार है
आई ख़िज़ाँ की याद तो दिल सर्द हो गयाकुछ देर भी तो लुत्फ़ न आया बहार का
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books