aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "asvaar"
अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँअब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
दिल से जो बात निकलती है असर रखती हैपर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है
मेरी हर बात बे-असर ही रहीनक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या
लोग कहते हैं मोहब्बत में असर होता हैकौन से शहर में होता है किधर होता है
इश्क़ की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सहीदर्द कम हो या ज़ियादा हो मगर हो तो सही
फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले थावो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था
तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवरतुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने की
वो किसी को याद कर के मुस्कुराया था उधरऔर मैं नादान ये समझा कि वो मेरा हुआ
आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखाआज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगहख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह
बुरा बुरे के अलावा भला भी होता हैहर आदमी में कोई दूसरा भी होता है
सब ख़्वाहिशें पूरी हों 'फ़राज़' ऐसा नहीं हैजैसे कई अशआर मुकम्मल नहीं होते
सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैंख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह
मुद्दतों ब'अद मयस्सर हुआ माँ का आँचलमुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई
इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
किस की तलाश है हमें किस के असर में हैंजब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में हैं
मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँनज़र मिल गई दिल धड़कने लगा
माँगा करेंगे अब से दुआ हिज्र-ए-यार कीआख़िर तो दुश्मनी है असर को दुआ के साथ
इस वक़्त वहाँ कौन धुआँ देखने जाएअख़बार में पढ़ लेंगे कहाँ आग लगी थी
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