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शेर
दीदा ओ दिल ने दर्द की अपने बात भी की तो किस से की
वो तो दर्द का बानी ठहरा वो क्या दर्द बटाएगा
इब्न-ए-इंशा
शेर
कभी हो सका तो बताऊँगा तुझे राज़-ए-आलम-ए-ख़ैर-ओ-शर
कि मैं रह चुका हूँ शुरूअ' से गहे ऐज़्द-ओ-गहे अहरमन
फ़िराक़ गोरखपुरी
शेर
जहान-ए-ख़ैर-ओ-शर में तज्रबा कैसा रहा अपना
ख़ुदा से गुफ़्तुगू होगी दिलों के राज़ खोलेंगे
तौहीद ज़ेब
शेर
जिसे ना-ख़्वाब कहते हैं उसी को ख़्वाब कहते हैं
तमीज़-ए-ख़ैर-ओ-शर में नुकता-ए-सद-मोतबर क्या है
सय्यद अमीन अशरफ़
शेर
ये सच है हम को भी खोने पड़े कुछ ख़्वाब कुछ रिश्ते
ख़ुशी इस की है लेकिन हल्क़ा-ए-शर से निकल आए