aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "baariikii"
कमर-ए-यार है बारीकी से ग़ाएब हर चंदमगर इतना तो कहूँगा कि वो मा'दूम नहीं
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँपहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहींभीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
तमाम रात नहाया था शहर बारिश मेंवो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहींतू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं
प्यासो रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िरमारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े
धूप ने गुज़ारिश कीएक बूँद बारिश की
बारिश शराब-ए-अर्श है ये सोच कर 'अदम'बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश कोमगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
कच्चे मकान जितने थे बारिश में बह गएवर्ना जो मेरा दुख था वो दुख उम्र भर का था
साथ बारिश में लिए फिरते हो उस को 'अंजुम'तुम ने इस शहर में क्या आग लगानी है कोई
याद आई वो पहली बारिशजब तुझे एक नज़र देखा था
हमारा ज़िंदा रहना और मरना एक जैसा हैहम अपने यौम-ए-पैदाइश को भी बरसी समझते हैं
छुप जाएँ कहीं आ कि बहुत तेज़ है बारिशये मेरे तिरे जिस्म तो मिट्टी के बने हैं
क्यूँ माँग रहे हो किसी बारिश की दुआएँतुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो
दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैंबारिश की एक बूँद न बे-कार जाने दूँ
नाला-ए-बुलबुल-ए-शैदा तो सुना हँस हँस करअब जिगर थाम के बैठो मिरी बारी आई
हैरत से तकता है सहरा बारिश के नज़राने कोकितनी दूर से आई है ये रेत से हाथ मिलाने को
हम से पूछो मिज़ाज बारिश काहम जो कच्चे मकान वाले हैं
बरस रही थी बारिश बाहरऔर वो भीग रहा था मुझ में
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