आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "biga.dte"
शेर के संबंधित परिणाम "biga.dte"
शेर
ज़िंदगी मिट्टी की सूरत चाक पर रक्खी हुई है
और हम बनते-बिगड़ते अपनी क़िस्मत देखते हैं
राघवेंद्र द्विवेदी
शेर
ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं
फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
शेर
खो दिया तुम को तो हम पूछते फिरते हैं यही
जिस की तक़दीर बिगड़ जाए वो करता क्या है
फ़िराक़ गोरखपुरी
शेर
अजीब लुत्फ़ कुछ आपस की छेड़-छाड़ में है
कहाँ मिलाप में वो बात जो बिगाड़ में है