aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chaa"
है कुछ तो बात 'मोमिन' जो छा गई ख़मोशीकिस बुत को दे दिया दिल क्यूँ बुत से बन गए हो
जब दिल पे छा रही हों घटाएँ मलाल कीउस वक़्त अपने दिल की तरफ़ मुस्कुरा के देख
बरसात का मज़ा तिरे गेसू दिखा गएअक्स आसमान पर जो पड़ा अब्र छा गए
सेहन-ए-चमन को अपनी बहारों पे नाज़ थावो आ गए तो सारी बहारों पे छा गए
फ़ज़ा-ए-दिल पे कहीं छा न जाए यास का रंगकहाँ हो तुम कि बदलने लगा है घास का रंग
हर तरफ़ छा गए पैग़ाम-ए-मोहब्बत बन करमुझ से अच्छी रही क़िस्मत मेरे अफ़्सानों की
जुनूँ होता है छा जाती है हैरतकमाल-ए-अक़्ल इक दीवाना-पन है
कपड़े गले के मेरे न हों आब-दीदा क्यूँमानिंद-ए-अब्र दीदा-ए-तर अब तो छा गया
छा गई एक मुसीबत की घटा चार तरफ़खुले बालों जो वो दरिया से नहा कर निकले
पारसाई की जवाँ-मर्गी न पूछतौबा करनी थी कि बदली छा गई
नज़र आने से रह गया अज़-बसछा गया इंतिज़ार आँखों में
मैं चाहता हूँ तुम्हें अपनी ज़िंदगी की तरहमिरे वजूद पे छा जाओ चाँदनी की तरह
अश्क के गिरते ही आँखों में अंधेरा छा गयाकौन सी हसरत का यारब ये चराग़-ए-ख़ाना था
गुल तो गुल ख़ार पे देखी जो कभी गर्म शु'आ'छा गए बाग़ पे हम अब्र-ए-बहाराँ हो कर
यूँ मंज़र-ए-हस्ती पे तिरी छा गईं आँखेंइक कैफ़ सा हर चीज़ पे बरसा गईं आँखें
महसूर ख़ुद हैं अपने सुरों को लिए खड़ेदहशत सी छा गई है सितम की सिपाह में
शोर मचा देती है उस की ख़ामोशीबोले तो फिर सन्नाटा छा जाता है
मैं भरी सड़कों पे भी बे-चाप चलने लग गयाघर में सोए लोग मेरे ज़ेहन पर यूँ छा गए
झील पर जैसे कोई काली घटा छा जाएनीली आँखों पे घनी पलकों को डाले रखना
इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओमिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है
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