aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "cham"
हम बंद किए आँख तसव्वुर में पड़े हैंऐसे में कोई छम से जो आ जाए तो क्या हो
इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओमिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है
उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिनदो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दोचार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चलहार जाने का हौसला है मुझे
तू भी सादा है कभी चाल बदलता ही नहींहम भी सादा हैं इसी चाल में आ जाते हैं
नए किरदार आते जा रहे हैंमगर नाटक पुराना चल रहा है
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम हैजिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाएकभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए
चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकलेआशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले
ये माना ज़िंदगी है चार दिन कीबहुत होते हैं यारो चार दिन भी
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलोसभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
तुम उस के पास हो जिस को तुम्हारी चाह न थीकहाँ पे प्यास थी दरिया कहाँ बनाया गया
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिनदेखे हैं हम ने हौसले परवरदिगार के
दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न थाइस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
कोई ख़ुद-कुशी की तरफ़ चल दियाउदासी की मेहनत ठिकाने लगी
चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद
क़दम मिला के ज़माने के साथ चल न सकेबहुत सँभल के चले हम मगर सँभल न सके
दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहेंदुनिया के मश्वरों पे न जा उस गली में चल
धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा हैन पूरे शहर पर छाए तो कहना
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