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शेर
दिल में तेरे चेहरा-ए-पुर-नूर को करता हूँ याद
इश्क़-ए-गेसू में हुआ करता है सौदा रात को
लाला माधव राम जौहर
शेर
इनायत की करम की लुत्फ़ की आख़िर कोई हद है
कोई करता रहेगा चारा-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर कब तक
फ़िराक़ गोरखपुरी
शेर
तअल्लुक़ आशिक़ ओ माशूक़ का तो लुत्फ़ रखता था
मज़े अब वो कहाँ बाक़ी रहे बीवी मियाँ हो कर
अकबर इलाहाबादी
शेर
सच इश्क़ में हैं आशिक़ ओ माशूक़ बराबर
जो मुश्किल-ए-मजनूँ है सो है मुश्किल-ए-लैला