aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "date"
ख़ुसूसन इम्तिहाँ की डेट भी जब यक-ब-यक आएअजब क्या फ़ेल हो जाएँ जो तय्यारी नहीं करते
किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देतेसवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज सेलेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से
मुसलसल हादसों से बस मुझे इतनी शिकायत हैकि ये आँसू बहाने की भी तो मोहलत नहीं देते
लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब कोमर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं
आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलेंहम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं
जान लेनी थी साफ़ कह देतेक्या ज़रूरत थी मुस्कुराने की
अपने जलने में किसी को नहीं करते हैं शरीकरात हो जाए तो हम शम्अ बुझा देते हैं
हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सरलोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं
तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगीईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी
अब तिरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैंकितनी रग़बत थी तिरे नाम से पहले पहले
रोज़ अच्छे नहीं लगते आँसूख़ास मौक़ों पे मज़ा देते हैं
बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिएहम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते
दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहींदोस्तों की वफ़ा से डरते हैं
मुझ को थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते
बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देतेतुम अच्छे मसीहा हो शिफ़ा क्यूँ नहीं देते
लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरीहम तिरी दोस्ती से डरते हैं
बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्नाकिनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते
सभी रिश्ते गुलाबों की तरह ख़ुशबू नहीं देतेकुछ ऐसे भी तो होते हैं जो काँटे छोड़ जाते हैं
भला हुआ कि कोई और मिल गया तुम सावगर्ना हम भी किसी दिन तुम्हें भुला देते
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