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शेर
मुझ से दरिया-नोश को साक़ी पिलाता है शराब
देखता हूँ मैं भी ज़र्फ़-ए-शीशा-ओ-पैमाना आज
हैदर अली आतिश
शेर
जनाब-ए-वाइज़-ए-रंगीं-बयाँ से कोई ये पूछे
कि क्यों हर वा'ज़ में ज़िक्र-ए-मय-ओ-पैमाना होता है
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
शेर
रात दिन गर्दिश में है पर हो नहीं सकता हनूज़
दौर-ए-दामान-ए-फ़लक इस दौर-ए-दामाँ का हरीफ़
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
शेर
गुल खिलाए न कहीं फ़ित्ना-ए-दौराँ कुछ और
आज-कल दौर-ए-मय-ओ-जाम से जी डरता है
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
शेर
जमील मज़हरी
शेर
किसे ख़बर थी कि ये दौर-ए-ख़ुद-ग़रज़ इक दिन
जुनूँ से क़ीमत-ए-दार-ओ-रसन छुपाएगा