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शेर
मुज़्तर ख़ैराबादी
शेर
बे-ख़ुदी में ले लिया बोसा ख़ता कीजे मुआफ़
ये दिल-ए-बेताब की सारी ख़ता थी मैं न था
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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बे-ख़ुदी में ले लिया बोसा ख़ता कीजे मुआफ़
ये दिल-ए-बेताब की सारी ख़ता थी मैं न था