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शेर
कीसा-ए-जाँ में तुझे देने को अब कुछ भी नहीं
सो दु'आ-ए-ख़ैर लेता जा ठहर ऐ अजनबी
अल्लामा तालिब जौहरी
शेर
सुना किस ने हाल मेरा कि जूँ अब्र वो न रोया
रखे है मगर ये क़िस्सा असर-ए-दुआ-ए-बाराँ
बन्द्र इब्न-ए-राक़िम
शेर
इब्न-ए-इंशा
शेर
कभी हो सका तो बताऊँगा तुझे राज़-ए-आलम-ए-ख़ैर-ओ-शर
कि मैं रह चुका हूँ शुरूअ' से गहे ऐज़्द-ओ-गहे अहरमन
फ़िराक़ गोरखपुरी
शेर
जहान-ए-ख़ैर-ओ-शर में तज्रबा कैसा रहा अपना
ख़ुदा से गुफ़्तुगू होगी दिलों के राज़ खोलेंगे
तौहीद ज़ेब
शेर
जिसे ना-ख़्वाब कहते हैं उसी को ख़्वाब कहते हैं
तमीज़-ए-ख़ैर-ओ-शर में नुकता-ए-सद-मोतबर क्या है